पंजाबी में आलू की खेती

आम जानकारी

आलू विश्व की एक महत्तवपूर्ण सब्जियों वाली फसल है। यह एक सस्ती और आर्थिक फसल है, जिस कारण इसे गरीब आदमी का मित्र कहा जाता है। यह फसल दक्षिणी अमरीका की है और इस में कार्बोहाइड्रेट और विटामिन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। आलू लगभग सभी राज्यों में उगाए जाते हैं। यह फसल सब्जी के लिए और चिपस बनाने के लिए प्रयोग की जाती है। यह फसल स्टार्च और शराब बनाने के लिए प्रयोग की जाती है। भारत में ज्यादातर उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, पंजाब, कर्नाटका, आसाम और मध्य प्रदेश में आलू उगाए जाते हैं। पंजाब में जालंधर, होशियारपुर, लुधियाणा और पटियाला मुख्य आलू पैदा करने वाले क्षेत्र हैं।

जलवायु

  • Season

    Temperature

    14-25°C
  • Season

    Rainfall

    300-500mm
  • Season

    Sowing Temperature

    15-25°C
  • Season

    Harvesting Temperature

    14-20°C
  • Season

    Temperature

    14-25°C
  • Season

    Rainfall

    300-500mm
  • Season

    Sowing Temperature

    15-25°C
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    Harvesting Temperature

    14-20°C
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    Temperature

    14-25°C
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    Rainfall

    300-500mm
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    Harvesting Temperature

    14-20°C
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    Temperature

    14-25°C
  • Season

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    Sowing Temperature

    15-25°C
  • Season

    Harvesting Temperature

    14-20°C

मिट्टी

यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है। अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है। यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा पानी खड़ने वाली और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती।

प्रसिद्ध किस्में और पैदावार

ज़मीन की तैयारी

बिजाई

बीज

खाद

खरपतवार नियंत्रण

सिंचाई

खेत में नमी के अनुसार बिजाई के तुरंत बाद या 2-3 दिन बाद सिंचाई करें। सिंचाई हल्की करें, क्योंकि खुले पानी से पौधे गलने लग जाते हैं। दरमियानी से भारी ज़मीन में 3-4 सिंचाइयां और रेतली ज़मीनों में 8-12 सिंचाइयों की जरूरत पड़ती है। दूसरी सिंचाई मिट्टी की नमी के अनुसार बिजाई से 30-35 दिनों के बाद करें। बाकी की सिंचाइयां ज़मीन की नमी और फसल की जरूरत के अनुसार करें। कटाई के 10-12 दिन पहले सिंचाई करना बंद कर दें।

पौधे की देखभाल

पत्ते खाने वाली सुंडी
पत्ते खाने वाली सुंडी : यह सुंडी पत्ते खाकर फसल का नुकसान करती है।
 
यदि खेत में इसका हमला दिखे तो क्लोरपाइरीफॉस या प्रोफैनाफॉस 2 मि.ली. या लैंबडा साइहैलोथ्रिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें।
 

फसल की कटाई

कटाई के बाद

सब से पहले आलुओं को छांट लें और खराब आलुओं को हटा दें। आलुओं को व्यास और आकार के अनुसार बांटे। बड़े आलू चिपस बनने के कारण अधिक मांग में रहते हैं। आलुओं को 4-7 डिगरी सैल्सियस तापमान और सही नमी पर भंडारण करें।

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